Diwali Firecracker Safety : दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान होने वाले हादसों से निपटने के लिए झारखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए गए हैं. पिछले साल रांची में पटाखों से 50 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस बार पहले से तैयारी की है. राजधानी के RIMS और सदर अस्पताल में बर्न मरीजों के इलाज के लिए कुल 30 बेड आरक्षित रखे गए हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य के सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों को भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है.
Diwali Firecracker Safety : पिछले साल 50 से अधिक लोग पहुंचे थे अस्पताल
पटाखों से होने वाले हादसों का असर पिछले साल दीपावली के दौरान रांची में देखने को मिला था. वर्ष 2025 में आतिशबाजी के कारण 50 से अधिक लोग घायल हुए थे. RIMS के बर्न वार्ड में छह मरीजों को भर्ती करना पड़ा था. इनमें एक मरीज 90 फीसदी से अधिक जल गया था.
इसे भी पढ़ें-रांची में होर्डिंग लगाकर डॉक्टरों के प्रचार पर रोक! 8 डॉक्टरों और अस्पतालों को मेडिकल काउंसिल का नोटिस
इसके अलावा RIMS की इमरजेंसी में दो दर्जन से अधिक घायल इलाज के लिए पहुंचे थे. सदर अस्पताल में भी 25 से अधिक लोगों ने पटाखों से झुलसने, आंखों में जलन और कान से जुड़ी परेशानी की शिकायत की थी. पिछले साल के इन आंकड़ों को देखते हुए इस बार अस्पतालों में पहले से व्यवस्था की गई है.
RIMS के ट्रॉमा सेंटर से बर्न वार्ड तक इलाज की तैयारी
RIMS में बर्न मरीजों के लिए 20 बेड रिजर्व रखे गए हैं. पटाखों से झुलसकर आने वाले मरीजों को सबसे पहले ट्रॉमा सेंटर में प्राथमिक उपचार दिया जाएगा. जरूरत के मुताबिक ड्रेसिंग और दूसरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को बर्न वार्ड में भर्ती किया जाएगा.
वहीं, सदर अस्पताल में भी 10 बेड का बर्न वार्ड तैयार रखा गया है. यहां जरूरी दवाओं और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की ड्यूटी भी तय की गई है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज मिल सके.
रांची ही नहीं, सभी जिलों के अस्पताल भी अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने दीपावली के दौरान संभावित हादसों को देखते हुए राज्य के सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों को भी सतर्क रहने का निर्देश दिया है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखने को कहा गया है.
गंभीर रूप से घायल मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की तैयारी भी रखी गई है. विभाग का उद्देश्य है कि पटाखों से घायल लोगों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़े और उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके.
पटाखों से जलने पर तुरंत करें ये काम
आतिशबाजी के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर चोट का कारण बन सकती है. इसलिए पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलाएं और बच्चों को अकेले आतिशबाजी न करने दें. पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनें और आसपास पानी की बाल्टी रखें.
इसे भी पढ़ें-25 साल से चकमा दे रहा चारा घोटाले का आरोपी लखनऊ में धराया, ट्रेन में CBI ने पकड़ा
पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से को करीब 20 मिनट तक सामान्य ठंडे पानी से धोएं. जले हुए स्थान पर टूथपेस्ट, घी या तेल न लगाएं और फफोलों को न फोड़ें. गंभीर रूप से जलने, आंखों में चोट लगने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें.
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का मकसद दीपावली के दौरान पटाखों से होने वाले हादसों में घायलों को बिना देरी इलाज उपलब्ध कराना है.
इसे भी पढ़ें-



