Jharkhand Voter List: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान निर्वाचन विभाग के सामने दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं. राज्य के 6,722 मतदान केंद्रों पर अब तक एक भी फॉर्म-6 नहीं पहुंचा है, जबकि कुछ मामलों में दूसरे परिवार के खतियान से फर्जी वंशावली तैयार कर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की शिकायतें भी मिली हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार ने अधिकारियों को एक तरफ नए और युवा मतदाताओं का पंजीकरण तेज करने, तो दूसरी तरफ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
रांची में 1,209 बूथों से नहीं आया एक भी फॉर्म-6
मतदान केंद्रवार आंकड़ों की समीक्षा में रांची सबसे पीछे है. जिले के 1,209 मतदान केंद्रों पर अब तक एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है. इसके बाद पलामू के 592, हजारीबाग के 572, गिरिडीह के 416 और धनबाद के 392 बूथ ऐसे हैं, जहां नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला है.
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इसके अलावा कई मतदान केंद्र ऐसे भी हैं, जहां आवेदन तो आए हैं, लेकिन उनकी संख्या बेहद कम है. धनबाद में 1,243, गिरिडीह में 1,072, रांची में 981, पलामू में 936 और हजारीबाग में 814 मतदान केंद्रों पर अब तक केवल एक से पांच फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं.
हर बूथ पर करीब 60 आवेदन आने का अनुमान
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव 2024 के बाद करीब दो साल बीत चुके हैं. राज्य में मतदाताओं की संख्या में हर वर्ष लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए सामान्य तौर पर प्रत्येक मतदान केंद्र से औसतन करीब 60 फॉर्म-6 आने का अनुमान लगाया गया है.
ऐसे में हजारों बूथों पर आवेदन की संख्या शून्य रहना या कुछ बूथों पर केवल एक से पांच आवेदन आना निर्वाचन विभाग के लिए चिंता का विषय है. अधिकारियों को अब बूथवार स्थिति की गहन समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रह जाए.
15 सितंबर तक नए मतदाता कर सकते हैं आवेदन
एसआइआर के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया गया था. इसके बाद पात्र नागरिक फॉर्म-6 और निर्धारित घोषणा-पत्र के जरिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं.
1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि माना गया है. इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके या करने वाले पात्र भारतीय नागरिकों का मतदाता सूची में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाना है. फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है.
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स्कूल-कॉलेजों में युवाओं के लिए चलेगा अभियान
निर्वाचन विभाग अब नए और युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है. बीएलओ को घर-घर जाकर ऐसे पात्र नागरिकों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है, जिनका नाम अभी मतदाता सूची में नहीं जुड़ा है.
इसके अलावा स्कूल और कॉलेजों में भी अभियान चलाया जाएगा. 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता पंजीकरण के लिए प्रेरित करने के साथ ईसीआइ नेट के जरिए ऑनलाइन आवेदन की जानकारी दी जाएगी. प्राप्त फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र का समय पर डिजिटाइजेशन कराने पर भी जोर दिया गया है.
फर्जी वंशावली बनाई तो मामला सिर्फ दस्तावेज की गलती नहीं
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए दूसरे व्यक्ति के खतियान से फर्जी वंशावली तैयार कराने के मामलों को निर्वाचन विभाग ने गंभीरता से लिया है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी गैर-पारिवारिक व्यक्ति को दूसरे परिवार की वंशावली या खतियान में वंशज के तौर पर शामिल करना दंडनीय हो सकता है.
दरअसल, एसआइआर के दौरान पुराने दस्तावेजों और वंशावली के जरिए मतदाता के पारिवारिक संबंधों का सत्यापन किया जा रहा है. ऐसे में फर्जी वंशावली के आधार पर किसी व्यक्ति को किसी परिवार का सदस्य या वंशज साबित करने की कोशिश चुनावी रिकॉर्ड को प्रभावित कर सकती है.
जाति और निवास प्रमाण-पत्र बनवाने की भी शिकायत
निर्वाचन विभाग को ऐसी शिकायतें भी मिली हैं, जिनमें दूसरे लोगों की वंशावली में नाम जोड़कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की बात सामने आई है. कुछ मामलों में इसी आधार पर जाति प्रमाण-पत्र और निवास प्रमाण-पत्र बनवाने का प्रयास किए जाने की सूचना है.
के रविकुमार ने अधिकारियों और नागरिकों को आगाह किया है कि दूसरे व्यक्ति के वंशज के साथ किसी गैर-पारिवारिक व्यक्ति को अपनी वंशावली या खतियान में वंशज के रूप में शामिल न किया जाए. विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में जोड़ने का प्रयास भी अपराध माना जाएगा.
गलत घोषणा पर एक साल तक की सजा
लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के अनुसार भारत का नागरिक नहीं होने वाला व्यक्ति मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य है. वहीं मतदाता सूची तैयार करने या उसमें नाम जोड़ने के लिए जानबूझकर गलत घोषणा या गलत जानकारी देने पर धारा 31 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.
इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
मतदाता सूची के रिकॉर्ड का होगा स्थायी संधारण
निर्वाचन विभाग के मुताबिक एसआइआर के दौरान किया गया मतदाता पंजीकरण सिर्फ मौजूदा सूची के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के रिकॉर्ड के लिए भी महत्वपूर्ण है. इससे जुड़े दस्तावेजों का स्थायी अभिलेख के रूप में संधारण किया जाता है.
इसी वजह से फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र प्राप्त करने से लेकर उनके डिजिटाइजेशन और नियमानुसार निष्पादन तक पूरी प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी करने का निर्देश दिया गया है.
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