विज्ञापन

वायरल वीडियो

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 60 साल में रिटायर महिला डेमोंस्ट्रेटर की दोबारा होगी बहाली

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय के एक फैसले को पलटते हुए मुक्ता प्रसाद को डेमोंस्ट्रेटर पद पर बहाल करने का आदेश दिया है. अदालत ने बकाया वेतन सहित सभी सेवा लाभ देने का निर्देश भी जारी किया है.

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने रांची विश्वविद्यालय से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. अदालत ने पूर्व कर्मचारी मुक्ता प्रसाद को डेमोंस्ट्रेटर पद पर दोबारा कार्यभार देने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी नियुक्ति पत्र में दर्ज एक शर्त के आधार पर किसी कर्मचारी के वैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा लिया गया निर्णय निरस्त कर दिया गया, जिसमें उन्हें डेमोंस्ट्रेटर से हटाकर लैब इंचार्ज बना दिया गया था और 60 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्त किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शीर्ष अदालत पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि लैब टेक्नीशियन और लैब इंचार्ज जैसी भूमिकाओं को डेमोंस्ट्रेटर पद के रूप में पुनः मान्यता दी जा सकती है. ऐसे में किसी भी नियुक्ति पत्र में यह शर्त जोड़ना कि कर्मचारी भविष्य में उस पद का दावा नहीं करेगा, संविधान के अनुच्छेद-14 और सार्वजनिक नीति के खिलाफ माना जाएगा. कोर्ट ने विश्वविद्यालय और रांची वीमेंस कॉलेज को निर्देश दिया कि मुक्ता प्रसाद को तुरंत डेमोंस्ट्रेटर पद पर कार्य करने की अनुमति दी जाए.

वेतन और सेवा लाभ पर भी आदेश

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में “नो वर्क, नो पे” का सिद्धांत लागू नहीं होगा क्योंकि कर्मचारी की ओर से कोई गलती नहीं पाई गई. कोर्ट ने निर्देश दिया कि 6 जून 2024 से अब तक का पूरा बकाया वेतन और अन्य लाभ 10 सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं. साथ ही यह भी कहा गया कि मुक्ता प्रसाद 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बनी रहेंगी. मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा था.

पूरे मामले को जानें

मुक्ता प्रसाद की नियुक्ति वर्ष 1987 में रांची वीमेंस कॉलेज के रसायन विभाग में लैब टेक्नीशियन के रूप में हुई थी. बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं, लेकिन नियमितीकरण पत्र में यह शर्त जोड़ी गई कि वे डेमोंस्ट्रेटर पद का दावा नहीं करेंगी. बाद में छठे और सातवें वेतन आयोग के तहत यूजीसी वेतनमान लागू करने की प्रक्रिया के दौरान यह विवाद सामने आया. उच्च शिक्षा विभाग ने इस शर्त के आधार पर आपत्ति जताई, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने उनका पद परिवर्तन कर उन्हें गैर-शिक्षण कर्मचारी मानते हुए 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त कर दिया था.

इसे भी पढ़ें-5 जून को झारखंड आएंगे नितिन नबीन, राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

इसे भी पढ़ें-लालू प्रसाद को रांची सिविल कोर्ट से राहत, इलाज के लिए सिंगापुर जाने की मिली अनुमति

इसे भी पढ़ें- रांची में 27 नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक, गुमला को नक्सलमुक्त होने का दावा

इसे भी पढ़ें-ईंधन संकट के बीच झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सिविल कोर्टों में होगी वर्चुअल सुनवाई

सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
संबंधित खबरें
विज्ञापन

जरूर पढ़ें

Patna
mist
24 ° C
24 °
24 °
88%
1.5m/s
20%
Fri
28 °
Sat
41 °
Sun
42 °
Mon
42 °
Tue
42 °

अन्य खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here