Jharkhand High Court : झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से नियुक्त शिक्षकों के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि एक ही चयन प्रक्रिया से नियुक्त शिक्षकों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतन और अन्य सभी सेवा लाभ दिए जाएं. हाईकोर्ट ने आदेश के अनुपालन के लिए सरकार को 12 सप्ताह का समय दिया है.
2016 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है मामला
यह मामला स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के तहत हुई नियुक्तियों से संबंधित है. इस भर्ती प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2019 में हुई थी, जबकि कुछ चयनित उम्मीदवारों को प्रशासनिक कारणों से बाद में नियुक्ति मिली. सभी की नियुक्ति एक ही विज्ञापन और एक ही चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी.
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नियुक्ति में हुई देरी उनकी वजह से नहीं थी, इसलिए उन्हें भी वर्ष 2019 में नियुक्त शिक्षकों के समान सेवा वरीयता और वेतन संबंधी लाभ मिलने चाहिए.
नियुक्ति की तारीख के आधार पर नहीं हो सकता भेदभाव
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि एक ही चयन प्रक्रिया से नियुक्त कर्मचारियों के बीच केवल नियुक्ति की तारीख के आधार पर अंतर करना न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक विलंब का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए. इस दौरान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया गया.
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राज्य सरकार को 12 सप्ताह में आदेश लागू करने के निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाओं को स्वीकार कर लिया. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पात्र शिक्षकों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतन और अन्य सभी सेवा लाभ 12 सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराए जाएं. साथ ही निर्धारित समय-सीमा में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया.
शिक्षकों के लिए अहम माना जा रहा फैसला
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा, जिन्हें एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित होने के बावजूद बाद में नियुक्ति मिली थी. कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला समान अवसर और समान सेवा लाभ के सिद्धांत को मजबूत करता है तथा प्रशासनिक देरी का नुकसान कर्मचारियों पर नहीं डालने का स्पष्ट संदेश देता है.
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