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बंगाल में मंत्रियों के इलाज पर नई सख्ती, राज्य से बाहर उपचार के लिए CM की मंजूरी जरूरी

Bengal News : पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रियों और उनके परिवार के इलाज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब राज्य से बाहर इलाज के लिए पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. सरकार ने इसे खर्च नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है.

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Bengal News : पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रियों और उनके परिवार के इलाज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब राज्य से बाहर इलाज के लिए पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. सरकार ने इसे खर्च नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है.

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Bengal News : पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रियों और उनके परिवार के पात्र सदस्यों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के नियमों में अहम बदलाव किया है. नयी व्यवस्था के तहत यदि कोई मंत्री या उनके दायरे में आने वाला आश्रित सदस्य राज्य से बाहर किसी अस्पताल में उपचार कराना चाहता है, तो उसे पहले मुख्यमंत्री की अनुमति लेनी होगी. इस संबंध में गृह विभाग की ओर से निर्देश जारी कर दिया गया है, जिसे आधिकारिक रूप से राजपत्र में भी प्रकाशित किया गया है. यह नियम मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री जैसे पदों पर लागू होगा. सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक स्तर पर एक सख्त लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है.

खर्च पर नियंत्रण और जवाबदेही पर जोर

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह चिकित्सा मद में होने वाले खर्च को अधिक व्यवस्थित करना और उसकी निगरानी को मजबूत बनाना है. पहले ऐसी स्थिति में राज्य के बाहर सरकारी खर्च पर इलाज कराने के लिए पूर्व-अनुमोदन की बाध्यता नहीं थी. इसी कारण कई बार खर्चों को लेकर सवाल उठते रहे. प्रशासन का मानना है कि जब चिकित्सा प्रतिपूर्ति और सरकारी भुगतान का दायरा बड़ा हो, तब प्रक्रिया को स्पष्ट और नियंत्रित रखना जरूरी हो जाता है. यही कारण है कि अब हर बाहरी चिकित्सा यात्रा को अनुमति से जोड़ दिया गया है, ताकि बाद में किसी तरह की वित्तीय या प्रशासनिक अस्पष्टता न रहे.

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पुराने विवादों के बाद सरकार सतर्क

पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन में चिकित्सा खर्चों को लेकर पहले भी बहस होती रही है. अलग-अलग दौर में कुछ मामलों ने सार्वजनिक चर्चा को जन्म दिया था, जिनमें नेताओं के इलाज और प्रतिपूर्ति को लेकर सवाल उठे थे. नवान्न से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसे उदाहरण भी सामने आए, जहां कुछ जनप्रतिनिधियों ने गंभीर बीमारी के बिना भी दूसरे राज्यों में नियमित स्वास्थ्य जांच करायी और बाद में उसका भारी खर्च सरकारी मद में समायोजित करने की कोशिश की. सरकार ने इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब प्रक्रिया को और कड़ा करने का फैसला लिया है, ताकि सुविधा का दुरुपयोग रोका जा सके और वास्तविक जरूरत वाले मामलों को ही प्राथमिकता मिले.

परिवार के किन सदस्यों को मिलेगा लाभ

नये नियमों में यह भी साफ किया गया है कि चिकित्सा सुविधा केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके कुछ आश्रित परिजनों को भी इसका लाभ मिलेगा. पात्रता के दायरे में अविवाहित बेटियां, माता-पिता और 18 वर्ष तक की आयु वाले आश्रित भाई-बहन शामिल किये गये हैं. यानी सरकार ने सुविधा को पूरी तरह खत्म नहीं किया है, बल्कि उसे स्पष्ट नियमों के भीतर रखा है. इससे एक ओर परिवार के वास्तविक आश्रित सदस्यों को सुरक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पात्रता को लेकर होने वाले भ्रम और विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है.

निजी अस्पतालों और जांच सेवाओं को भी शामिल किया गया

सरकार ने नयी व्यवस्था में चिकित्सा सेवाओं का दायरा भी व्यापक रखा है. अब सिर्फ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त अस्पताल ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2017 के तहत पंजीकृत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को भी इस प्रणाली में शामिल किया गया है. इस दायरे में डॉक्टर से परामर्श, पैथोलॉजी जांच, रेडियोलॉजी सेवाएं, दवाएं, टीकाकरण, ऑपरेशन और दंत चिकित्सा तक को शामिल किया गया है. यानी जरूरत पड़ने पर मंत्री और उनके पात्र परिजन व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे, लेकिन अब यह सब एक तय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होगा.

सरकारी अस्पताल में पूरी राहत, निजी इलाज पर प्रतिपूर्ति

अधिसूचना के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में उपचार पहले की तरह नि:शुल्क रहेगा. वहीं यदि इलाज किसी निजी या पंजीकृत स्वास्थ्य संस्थान में कराया जाता है, तो राज्य सरकार या तो सीधे खर्च वहन करेगी या फिर निर्धारित नियमों के तहत प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराएगी. इतना ही नहीं, योजना के तहत डॉक्टर के निजी चैंबर में परामर्श, मंत्री के आवास पर चिकित्सा सेवा, अस्पताल में उच्च श्रेणी के वार्ड में भर्ती रहने और विशेष नर्सिंग जैसी सुविधाओं का खर्च भी कवर किया गया है. कुल मिलाकर सरकार ने सुविधा को समाप्त नहीं किया, बल्कि उसे अधिक जवाबदेह, नियंत्रित और औपचारिक ढांचे में बांध दिया है.

इसे भी पढ़ें-चुनाव से पहले ममता बनर्जी का बड़ा फैसला, 23 अहम पदों से दिया इस्तीफा

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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