इस खबर में क्या है?
Bhagalpur Munger Marine Drive : भागलपुर-मुंगेर मरीन ड्राइव परियोजना जमीन के पेंच में फंस गयी है. जनवरी में जमीन अधिग्रहण के लिए भेजा गया प्रस्ताव नक्शा नहीं होने के कारण वापस लौटने के बाद अब तक दोबारा नहीं भेजा जा सका है. करीब आठ महीने से प्रस्ताव का इंतजार है. दूसरी ओर, निर्माण एजेंसी ने शंकरपुर दियारा में 8 से 10 एकड़ जमीन पर अपना प्लांट तैयार करना शुरू कर दिया है.
एक तरफ प्लांट तैयार, दूसरी तरफ जमीन अधिग्रहण अटका
करीब 9,998 करोड़ रुपये की इस बड़ी परियोजना में निर्माण की तैयारियां और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल अलग-अलग रफ्तार से चल रही हैं. निर्माण एजेंसी ने साइट पर जरूरी संसाधन जुटाने शुरू कर दिये हैं, लेकिन परियोजना के लिए आवश्यक जमीन अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है.
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जनवरी में बिहार रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) ने जमीन अधिग्रहण के लिए भूअर्जन विभाग को प्रस्ताव भेजा था. प्रस्ताव के साथ संबंधित नक्शा नहीं होने के कारण विभाग ने उसे वापस कर दिया. इसके बाद संशोधित प्रस्ताव भेजा जाना था, लेकिन आठ माह बाद भी ऐसा नहीं हो सका.
प्रस्ताव आयेगा तभी शुरू होगी भूअर्जन की कार्रवाई
जिला भूअर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि बीएसआरडीसीएल की ओर से अभी तक नया प्रस्ताव नहीं मिला है. जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रस्ताव के साथ संबंधित नक्शा देना जरूरी है.
यानी जब तक संशोधित प्रस्ताव विभाग तक नहीं पहुंचता, तब तक भूअर्जन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना नहीं है. इतने लंबे समय से प्रस्ताव लंबित रहने से परियोजना की समयसीमा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
शंकरपुर दियारा में 8-10 एकड़ का निर्माण प्लांट
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भले ही अटकी हो, लेकिन परियोजना की निर्माण एजेंसी ने अपनी तैयारी रोक नहीं रखी है. शंकरपुर दियारा में करीब 8 से 10 एकड़ क्षेत्र में निर्माण प्लांट विकसित किया जा रहा है.
यहां निर्माण सामग्री, मशीनरी और परियोजना से जुड़ी अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है. बाढ़ का मौसम खत्म होने के बाद प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने की तैयारी है.
बाढ़ के बाद काम पकड़ सकता है रफ्तार
निर्माण एजेंसी की तैयारियों के बीच अब नजर बाढ़ के बाद होने वाली गतिविधियों पर है. बाढ़ का पानी उतरने के बाद निर्माण प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित करने और साइट पर काम तेज करने की योजना है.
हालांकि, जमीन अधिग्रहण का मामला समय पर नहीं सुलझा तो निर्माण की रफ्तार और परियोजना की निर्धारित समयसीमा दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़ेगा भागलपुर-मुंगेर
मरीन ड्राइव परियोजना को सामान्य सड़क के बजाय एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है. इसका बड़ा हिस्सा ऊंचे पिलरों पर तैयार किया जायेगा.
परियोजना पूरी होने के बाद भागलपुर और मुंगेर के बीच आवागमन को नया विकल्प मिलने के साथ दोनों जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है.
48 महीने की समयसीमा, 9,998 करोड़ की लागत
इस मेगा परियोजना को दो चरणों में पूरा करने की योजना है. निर्माण के लिए 48 महीने की समयसीमा निर्धारित की गयी है. परियोजना की अनुमानित लागत करीब 9,998 करोड़ रुपये है.
निर्माण का जिम्मा दिलीप बिल्डिकॉन लिमिटेड को दिया गया है. अब परियोजना के अगले चरण की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीन अधिग्रहण के लिए संशोधित प्रस्ताव कब भेजा जाता है और प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है.
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