hormuz strait : होर्मुज स्ट्रेट और ओमान तट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच तीन भारतीय नागरिकों की मौत का मामला सामने आने के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है. पिछले चार दिनों के दौरान तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुई अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीयों की जान चली गई. घटना के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इस क्षेत्र में अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय समुद्री कर्मी विभिन्न जहाजों पर तैनात हैं. हाल के सप्ताहों में ईरान ने होर्मुज क्षेत्र में अपनी निगरानी बढ़ाई है, जबकि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी लागू किए हुए है.
भारत ने उठाया सुरक्षा का मुद्दा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने बताया कि पलाऊ ध्वज वाले जहाज एमटी सेटेबेलो पर हुई कार्रवाई के बाद भारत ने तत्काल अमेरिकी प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया. इस संबंध में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब किया गया और भारत की चिंताओं से अवगत कराया गया. भारत ने अमेरिका से कहा कि ऐसी घटनाएं बंद होनी चाहिए और क्षेत्रीय तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए.
भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए. विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और जीवन की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
किन जहाजों पर हुई कार्रवाई
विदेश मंत्रालय के मुताबिक कार्रवाई की जद में आए तीनों जहाज विदेशी ध्वज वाले थे. इनमें एमटी मैरीवेक्स और एमटी सेटेबेलो पलाऊ के ध्वज वाले जहाज थे, जबकि जलवीर गिनी-बिसाऊ के ध्वज के तहत संचालित हो रहा था. हालांकि इन जहाजों का स्वामित्व भारतीय नहीं था, लेकिन इन पर भारतीय नाविक बड़ी संख्या में सवार थे.
8 जून को अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी मैरीवेक्स को निशाना बनाया था. उस समय जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे. अधिकारियों के अनुसार चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया और किसी भारतीय को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.
दो हमलों की पुष्टि, एक पर अब भी चुप्पी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एमटी मैरीवेक्स और एमटी सेटेबेलो से जुड़ी कार्रवाई की पुष्टि की है. हालांकि जलवीर जहाज पर कथित हमले को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इस बीच भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में बना हुआ है.
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि एमटी सेटेबेलो पर मौजूद अन्य 25 चालक दल सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.
मृतकों के परिवारों को मिलेगी सहायता
सरकार ने हमलों में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है. मुकेश मंगल के अनुसार सीमैन वेलफेयर फंड सोसाइटी को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक मृतक नाविक के परिजनों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए.
समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर असर
होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है. हालिया घटनाओं के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है. भारत ने कहा है कि वह भारतीय नाविकों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहेगा. साथ ही पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा.
ओमान की खाड़ी में जारी रही अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (CENTCOM) ने गुरुवार को दावा किया कि होर्मुज क्षेत्र के बाहर ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर के खिलाफ कार्रवाई की गई. सेना के अनुसार गिनी-बिसाऊ ध्वज वाला यह जहाज अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था और ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहा था. अमेरिकी सेना ने कहा कि 10 जून की देर रात हेलफायर मिसाइल दागी गई, जिससे जहाज में विस्फोट हुआ. अमेरिकी पक्ष के अनुसार नाकाबंदी लागू होने के बाद यह नौवां जहाज है जिसे निष्क्रिय किया गया है.
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