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Gulmarg Cable Car Fault: जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यटन स्थल गुलमर्ग में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब गंडोला रोपवे सेवा तकनीकी समस्या के कारण अचानक रोकनी पड़ी. रोपवे के विभिन्न केबिनों में मौजूद सैकड़ों पर्यटक काफी समय तक हवा में फंसे रहे. हालांकि राहत की बात यह रही कि बचाव एजेंसियों और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयास से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
#UPDATE | J&K | Rescue Op, at Gulmarg, has been successfully concluded: Jammu & Kashmir Police https://t.co/jRuLUoEHm3
— ANI (@ANI) May 25, 2026
बीच सफर में थम गई रोपवे सेवा
जानकारी के अनुसार, दोपहर के समय रोपवे संचालन के दौरान तकनीकी गड़बड़ी सामने आई. एहतियात के तौर पर पूरी सेवा को तत्काल रोक दिया गया, जिससे कई केबिन ट्रैक पर ही रुक गए. कुछ केबिन काफी ऊंचाई पर होने के कारण यात्रियों की चिंता बढ़ गई.
राहत-बचाव के लिए कई एजेंसियां उतरीं मैदान में
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने व्यापक बचाव अभियान शुरू किया. राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस और सेना के जवानों ने समन्वय के साथ ऑपरेशन चलाया. खराब मौसम और बारिश के बावजूद बचाव दल लगातार मौके पर डटे रहे.
STORY | 300 tourists rescued in seven-hour operation after Gulmarg Gondola malfunctions
— Press Trust of India (@PTI_News) May 25, 2026
Around 300 tourists in 65 cabins of Gulmarg Gondola were stranded mid-air on Monday after the Asia's highest ropeway developed technical problems, and were rescued after an arduous seven-hour… pic.twitter.com/51XLNi7rKL
शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में पर्यटकों को निकाला गया
बचाव अभियान शुरू होने के कुछ घंटों के भीतर बड़ी संख्या में पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया. इसके बाद शेष लोगों को भी चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला गया. अधिकारियों ने पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा.
प्रशासनिक स्तर पर लगातार हुई निगरानी
घटना के बाद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी. सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बनाकर राहत कार्य को तेज करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी यात्री को नुकसान न पहुंचे.
पर्यटकों की सुरक्षा रही सर्वोच्च प्राथमिकता
अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी खराबी सामने आते ही संचालन रोक दिया गया था, जिससे किसी बड़े हादसे की संभावना टल गई. बचाव अभियान पूरा होने के बाद रोपवे प्रणाली की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है ताकि खराबी के कारणों का पता लगाया जा सके.
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