Bihar Police News: बिहार पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी विनय कुमार ने राज्य की कानून-व्यवस्था से लेकर पुलिस बल की मजबूती तक कई अहम जानकारी साझा की. हत्या और डकैती के मामलों में कमी से लेकर नक्सल प्रभावित जिलों की स्थिति, पुलिसकर्मियों की भर्ती, नए थाना भवन और साइबर व्यवस्था तक का ब्योरा सामने रखा गया. डीजीपी ने नशा, मानव तस्करी और बच्चों की चोरी को बड़ी चुनौती बताते हुए समाज की भागीदारी पर भी जोर दिया.
अब बिहार में नहीं बचा एक भी नक्सल प्रभावित जिला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नक्सल विरोधी अभियान को पुलिस की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया. डीजीपी ने कहा कि अब बिहार का कोई भी जिला उग्रवाद प्रभावित नहीं है.
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उन्होंने 2005 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय कई इलाकों में नक्सली गतिविधियों का गंभीर प्रभाव था. अब ऐसे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए पर्यटन, शिक्षा और उद्योग पर ध्यान दिया जाएगा.
हत्या 10 और डकैती के मामले 31 प्रतिशत घटे
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आंकड़ों में हत्या और डकैती के मामलों में कमी का दावा किया गया. हत्या की घटनाओं में 10.1 प्रतिशत, जबकि डकैती के मामलों में 31.32 प्रतिशत की गिरावट बताई गई.
डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस लगातार काम कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद और पारिवारिक विवाद जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आते हैं.
डेढ़ साल में 22 हजार भर्ती, 26 हजार से अधिक पदों पर प्रक्रिया
पुलिस बल को मजबूत करने के लिए भर्ती प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई. डीजीपी के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में 22 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है.
वहीं, 26,574 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है और इसे एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस तरह डेढ़ साल की अवधि में 50 हजार से अधिक नई भर्तियां करने की दिशा में काम चल रहा है.
600 थाना भवन बन रहे, डायल-112 पर 172 करोड़ खर्च
पुलिस व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को लेकर भी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई. राज्य में करीब 600 थाना भवनों का निर्माण चल रहा है.
डायल-112 को और मजबूत करने के लिए 172 करोड़ रुपये की योजना पर काम किया जा रहा है. इसके अलावा पटना में पुलिस साइबर सेल के लिए आधुनिक भवन तैयार करने की योजना है.
नशे के नेटवर्क पर पुलिस की नजर
डीजीपी ने युवाओं में बढ़ते नशे को गंभीर चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार गांजा और ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ रही है. नशीले पदार्थों की सप्लाई में नेपाल, नॉर्थ ईस्ट और दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आ रही है.
उन्होंने साफ कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है. इसके लिए समाज को भी आगे आना होगा.
मानव तस्करी और बच्चों की चोरी को भी बताया चुनौती
मानव तस्करी और बच्चों की चोरी के मामलों पर डीजीपी ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के पीछे अशिक्षा और गरीबी जैसे सामाजिक कारण भी हैं. ऐसे मामलों को केवल पुलिस कार्रवाई के जरिये खत्म नहीं किया जा सकता. समाज को भी बच्चों की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में भूमिका निभानी होगी.
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15 हजार दंगों से करीब 100 तक पहुंचा आंकड़ा
कानून-व्यवस्था में बदलाव का उदाहरण देते हुए डीजीपी ने पुराने आंकड़ों का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक पहले बिहार में एक साल में करीब 15 हजार दंगे होते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 100 के आसपास रह गई है.
उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण केवल पुलिस की कार्रवाई का विषय नहीं है. कई अपराधों की जड़ सामाजिक विवादों में होती है, इसलिए समाज की भूमिका भी अहम है.
पहली बार बिहार पुलिस को मिलेगा प्रेसिडेंट्स कलर
बिहार पुलिस के लिए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई. डीजीपी ने बताया कि बिहार पुलिस को पहली बार प्रेसिडेंट्स कलर अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस को यह सम्मान 1954 में मिल चुका था, लेकिन बिहार पुलिस को पहली बार यह गौरव मिलने जा रहा है.
18 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक
स्वतंत्रता दिवस पर बिहार के 18 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा. सम्मान पाने वालों में सिपाही और हवलदारों के साथ महिला एसपी, डीएसपी और आईजी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं.
भरत तिवारी मामले में न्यायिक जांच का हवाला
भोजपुर के भरत तिवारी मामले पर सवाल पूछे जाने पर डीजीपी ने कहा कि मामले की न्यायिक जांच चल रही है. उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने के आरोपों की भी जांच हो रही है.
घटना में शामिल एक पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अपराध से लड़ाई में समाज को भी जोड़ने पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की उपलब्धियों के साथ उन चुनौतियों को भी सामने रखा गया, जिनका समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है. नशा, मानव तस्करी, बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक व जमीन विवाद से जुड़ी हिंसा जैसे मामलों में डीजीपी ने समाज की भागीदारी को जरूरी बताया.
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