Video: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट में अब सिर्फ तेज रफ्तार ट्रेन ही नहीं, बल्कि उसके लिए तैयार हो रहा अत्याधुनिक ट्रैक भी चर्चा में है. भारतीय रेलवे पहली बार ऐसे हाई-स्पीड टर्नआउट लगा रहा है, जिनमें मूवेबल क्रॉसिंग (स्विंग-नोज) तकनीक का इस्तेमाल होगा. यह सिस्टम 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली ट्रेनों के लिए डिजाइन किया गया है. इसका वीडियो न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया है.
क्या है स्विंग-नोज टर्नआउट की खासियत?
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ट्रैक पर पहियों के गुजरने के दौरान कोई गैप नहीं रहता. इससे ट्रेन के पहियों को लगातार बेहतर सहारा मिलता है और झटके, कंपन, शोर तथा ट्रैक की टूट-फूट में कमी आती है. हाई-स्पीड रेल के सुरक्षित और आरामदायक संचालन के लिए इसे महत्वपूर्ण तकनीक माना जा रहा है.
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VIDEO | For the first time on the Indian railway network, the Mumbai–Ahmedabad High-Speed Rail Project is using turnouts equipped with movable crossings, also known as swing-nose crossings, designed for speeds of up to 320 kmph. The system provides a continuous, gap-free rail… pic.twitter.com/DqRu8Q9wEu
— Press Trust of India (@PTI_News) September 22, 2026
दो पॉइंट मशीनें संभालेंगी पूरा सिस्टम
हर हाई-स्पीड टर्नआउट में दो पॉइंट मशीनें लगाई गई हैं. ये मशीनें स्विच और मूवेबल क्रॉसिंग दोनों को नियंत्रित करती हैं. रेलवे के अनुसार सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए इस पूरे सिस्टम की कई स्तरों पर जांच भी की जाती है.
508 किलोमीटर लंबा है हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
पीआईबी के अनुसार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है. यह कॉरिडोर गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा. परियोजना में मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत 12 स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं.

सरकार ने बताया है कि परियोजना के लिए आवश्यक 1,389.5 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है. साथ ही 1,651 बिजली, पानी और अन्य उपयोगिता सेवाओं की लाइनों को भी दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा चुका है.
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समुद्र के नीचे बन रही 21 किलोमीटर लंबी सुरंग
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में समुद्र के नीचे बनने वाली करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण भी जारी है. महाराष्ट्र के घनसोली से शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है.
महाराष्ट्र में रेलवे बजट में 20 गुना बढ़ोतरी
रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाती है और राज्य सरकार सहित विभिन्न विभागों की राय लेने के बाद नीति आयोग व वित्त मंत्रालय जैसी संस्थाओं से स्वीकृति मिलती है. इसी बीच महाराष्ट्र में रेलवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा कार्यों के लिए बजट में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
2009-14 के दौरान जहां औसतन 1,171 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष मिलते थे, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 23,778 करोड़ रुपये हो गया, यानी लगभग 20 गुना वृद्धि.
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