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Muzaffarpur : चमकी बुखार को लेकर बढ़ी चिंता, गर्मी के बीच सामने आए AES के कई मामले

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार को लेकर फिर सतर्कता बढ़ गई है. बच्चों को हल्का बुखार होने पर भी परिवार वाले अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों ने बच्चों को धूप और खाली पेट से बचाने की सलाह दी है.

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Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार को लेकर फिर सतर्कता बढ़ गई है. बच्चों को हल्का बुखार होने पर भी परिवार वाले अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों ने बच्चों को धूप और खाली पेट से बचाने की सलाह दी है.

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Muzaffarpur News: उत्तर बिहार में तापमान बढ़ने के साथ ही एक बार फिर चमकी बुखार (AES) को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. खासकर मुजफ्फरपुर में छोटे बच्चों के माता-पिता काफी सतर्क नजर आ रहे हैं. अस्पतालों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जहां सामान्य बुखार या कमजोरी होने पर भी परिजन बच्चों को तुरंत जांच के लिए लेकर पहुंच रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ी

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस सीजन में एईएस से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं. इनमें मुजफ्फरपुर के अलावा उत्तर बिहार के अन्य जिलों से भी बच्चे इलाज के लिए लाए गए हैं. बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.

ओपीडी में बढ़ी अभिभावकों की चिंता

डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों बच्चों के अभिभावक काफी डरे हुए हैं. अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर माता-पिता सबसे पहले यही पूछ रहे हैं कि बच्चे को कहीं चमकी बुखार तो नहीं है. हालांकि चिकित्सकों ने साफ किया है कि हर बुखार या कमजोरी को एईएस मान लेना सही नहीं होगा.

बच्चों को धूप और भूखे पेट से बचाने की सलाह

विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चे लंबे समय तक तेज धूप में न रहें. इसके अलावा रात में बच्चों को बिना खाना खिलाए नहीं सुलाने की भी सलाह दी गई है. डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर में पानी और ग्लूकोज की कमी बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है.

ORS और तरल पदार्थ पर जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों को नियमित रूप से पानी, ओआरएस, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थ देने की सलाह दी है. साथ ही पौष्टिक और मीठा भोजन भी जरूरी बताया गया है, ताकि बच्चों के शरीर में ऊर्जा की कमी न हो.

लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचें

चिकित्सकों के अनुसार, यदि बच्चे को तेज बुखार, झटके, सुस्ती, बेहोशी या चमकी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचाव संभव है.

जागरूकता को सबसे अहम माना

डॉक्टरों का कहना है कि एईएस को लेकर डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है. समय पर पहचान, सही खानपान और तत्काल इलाज से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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