Bihar Government Action: बिहार में सरकारी शिक्षकों के कोचिंग और निजी ट्यूशन से जुड़े रहने पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. नए निर्देश के तहत अब कोई भी सरकारी शिक्षक या शिक्षिका किसी प्राइवेट कोचिंग संस्थान में पढ़ाने का काम नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा निजी ट्यूशन चलाने या किसी अन्य व्यावसायिक शिक्षण गतिविधि से जुड़ने की भी अनुमति नहीं होगी. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन शिक्षक आचार संहिता के खिलाफ माना जाएगा और संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. यह व्यवस्था राज्यभर में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है.
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सभी जिलों को भेजा गया निर्देश
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर ने गुरुवार को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर नए आदेश के अनुपालन का निर्देश दिया है. पत्र में कहा गया है कि अपने-अपने जिलों में ऐसे सरकारी शिक्षकों की पहचान की जाए जो कोचिंग संस्थानों में पढ़ा रहे हैं या निजी ट्यूशन चला रहे हैं. ऐसे मामलों में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है.
विभाग ने बताई कार्रवाई की वजह
शिक्षा विभाग का कहना है कि कई मामलों में यह देखा गया है कि सरकारी शिक्षक स्कूल के बाद कोचिंग संस्थानों या निजी ट्यूशन से जुड़े रहते हैं. विभाग के अनुसार इसका असर विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है. इसी कारण शिक्षकों का पूरा समय और शैक्षणिक क्षमता विद्यालय के छात्रों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है.
घर, स्कूल या कोचिंग सेंटर, कहीं भी नहीं पढ़ा सकेंगे
जारी निर्देश में यह भी कहा गया है कि कोई सरकारी शिक्षक स्कूल परिसर, अपने आवास, कोचिंग संस्थान या किसी अन्य स्थान पर ट्यूशन अथवा कोचिंग कक्षाएं संचालित नहीं करेगा. जिला शिक्षा पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि इस आदेश का पालन प्रभावी तरीके से हो.
विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई सरकारी शिक्षक विद्यालय समय समाप्त होने के बाद निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने जाते हैं या अपने घरों पर ट्यूशन चलाते हैं. इन्हीं शिकायतों के आधार पर विभाग ने पूरे राज्य में यह व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस फैसले को राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया. उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग मिलकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं. मंत्री के अनुसार एक समय ऐसा था जब शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन और प्रदर्शन करते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदली हैं.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षक सरकार और विभाग की नीतियों का सम्मान करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं. उनके मुताबिक स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने और विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है.
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