Gopal Mandal joins Congress: बिहार की राजनीति में गोपाल मंडल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. कभी अपने बयानों से तो कभी अपने अलग अंदाज से सुर्खियां बटोरने वाले गोपालपुर के पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल ने अब अपना सियासी ठिकाना बदल लिया है. लंबे समय तक JDU के साथ राजनीति करने के बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की मौजूदगी में गोपाल मंडल ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की.
गोपाल मंडल के कांग्रेस में जाने के साथ ही भागलपुर और नवगछिया की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है. खास बात यह है कि कभी नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले गोपाल मंडल अब उसी राजनीतिक खेमे के सामने खड़े नजर आएंगे, जिसके साथ उन्होंने लंबे समय तक अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाई थी.
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टिकट कटा तो बदले तेवर, अब बदल गया राजनीतिक दल
गोपाल मंडल की JDU से दूरी अचानक नहीं बनी. 2025 के विधानसभा चुनाव में गोपालपुर सीट से उनका टिकट काटकर JDU ने बुलो मंडल को उम्मीदवार बनाया था. इसके बाद गोपाल मंडल ने पार्टी से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया. हालांकि, चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
विधानसभा चुनाव के बाद भी गोपाल मंडल की राजनीतिक सक्रियता कम नहीं हुई. उनके बयान लगातार चर्चा में रहे और अब कांग्रेस में शामिल होने के फैसले के साथ उनकी अगली राजनीतिक दिशा भी साफ हो गई है.
चार चुनाव जीतकर बनाई थी मजबूत पकड़
गोपाल मंडल गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रहे हैं. 2005 से 2020 तक उन्होंने JDU के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी जगह बनाए रखी. इसी वजह से गोपालपुर और नवगछिया इलाके में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान बनी.
अब वही गोपाल मंडल कांग्रेस के साथ अपनी नई पारी शुरू कर चुके हैं. उनके इस कदम को कांग्रेस के लिए भागलपुर-नवगछिया क्षेत्र में एक चर्चित राजनीतिक चेहरे की एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है.
पाला बदलने से किसके समीकरण बिगड़ेंगे?
गोपाल मंडल का कांग्रेस में जाना केवल एक नेता के दल बदलने तक सीमित नहीं है. भागलपुर और नवगछिया की स्थानीय राजनीति में उनका अपना प्रभाव और समर्थकों का आधार रहा है. ऐसे में उनका नया राजनीतिक ठिकाना आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
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दूसरी ओर, कांग्रेस को एक ऐसा चेहरा मिला है जो क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है और जिसकी मौजूदगी चुनावी माहौल में चर्चा पैदा करने की क्षमता रखती है.
बयान हो या अंदाज, सुर्खियां कभी पीछा नहीं छोड़तीं
गोपाल मंडल की राजनीतिक पहचान सिर्फ चुनावी जीत तक सीमित नहीं रही. उनके बेबाक बयान और सार्वजनिक गतिविधियां अक्सर चर्चा का कारण बनती रही हैं. हाल के दिनों में भी उनके कुछ वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित हुए.
अब JDU से अलग होकर कांग्रेस में पहुंचने के बाद एक बार फिर उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर रहेगी. सवाल यह है कि गोपाल मंडल की यह नई पारी कांग्रेस को भागलपुर-नवगछिया में कितना फायदा पहुंचाती है और खुद गोपाल मंडल के लिए यह सियासी बदलाव कितनी दूर तक जाता है.
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